अल्जाइमर – जरुरत है अपनों के प्यार और देखभाल की

दुनिया में हर तीसरे सेकंड एक शख्स भुलक्कड़ बनता जा रहा है। भागती-दौड़ती जिंदगी के तनाव, सही खानपान व कसरत की कमी और बढ़ती उम्र जैसे कई कारण हमारी याददाश्त छीनने में लगे हुए हैं। डिमेंशिया के ही एक प्रकार अल्जाइमर में खासतौर से बुजुर्ग धीरे-धीरे अपनी याददाश्त खोने लगते हैं। हालांकि सिर्फ बुजुर्ग ही नहीं बल्कि बच्चे भी इस बीमारी की गिरफ्त में आने लगे हैं। विश्व अल्जामइर दिवस के मौके पर आइए जानते हैं इस खतरे के बारे में। अल्जाइमर मे जरुरत है अपनों के प्यार और देखभाल की

अल्जाइमर से दिमाग की कोशिकाएँ नष्ट हो जाती हैं, जिसके कारण याददाश्त, सोचने की शक्ति और अन्य व्यवहार बदलने लगते हैं। इसका असर सामाजिक जीवन पर पड़ता है। बीमारी जब अडवांस्ड स्थिति में पहुंच जाती है, तो मरीज अपने परिजनों और रिश्तेदारों को पहचनाना तक बंद कर देता है. देश में लगभग 16 लाख लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं. यह कहना है इन्द्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के न्यूरोलोजी विभाग के सीनियर कन्सलटेन्ट डॉ. विनीत सूरी का.

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Organ Donation


किसी जीवित या मृत व्यक्ति के शरीर का ऊतक या कोई अंग दान करना “अंगदान” (Organ donation) कहलाता है। यह ऊतक या अंग किसी दूसरे जीवित व्यक्ति के शरीर में प्रत्यारोपित (ट्रान्सप्लान्ट) किया जाता है। इस कार्य के लिये दाता के शरीर से दान किये हुए अंग को शल्यक्रिया द्वारा निकाला जाता है।

सामान्य स्वास्थ्य वाला कोई भी व्यक्ति अपने अंगों को दान कर सकता है।

अंगदान किसी के भी जीवन को बचा सकता है, लेकिन भारत में लोगों के बीच गलत धारणा और ज्ञान की कमी होने के कारण अंगदान का प्रतिशत उतना अधिक नहीं है, जितना कि इसे होना चाहिए। अंगदान करने वालो की कमी होने के कारण अंग प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा करने वाले सैकड़ों लोग मर रहे हैं।

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Found Plastic in Salt IIT Bombay Research


भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे के एक अध्ययन में देश में कई ब्रांड के नमक में माइक्रोप्लास्टिक पाया गया है. माइक्रोप्लास्टिक वास्तव में प्लास्टिक के बहुत छोटे कण होते हैं. इनका आकार पांच मिलीमीटर से भी कम होता है. पर्यावरण में उत्पाद के धीरे-धीरे विघटन से इनका निर्माण होता है.

आईआईटी बॉम्बे के दो सदस्यों वाली एक टीम ने नमक को लेकर ये अध्ययन किया है।आईआईटी-बंबई के सेंटर फॉर इनवायर्नमेंट साइंस एंड इंजीनियरिंग की एक टीम ने जांचे गए नमूनों में माइक्रो-प्लास्टिक के 626 कण पाये हैं.

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mushroom good for health

मशरूम की सब्‍जी हर किसी को पसंद होती है और भला हो भी क्यों ना, यह स्वास्थ्यवर्धक एवं औषधीय गुणों से युक्त है, यह आसानी से पाचक भी है और बीमारियों को दूर करने में भी मददगार है। 

अमेरिका की पेंसिल्वेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर मार्गरीटा टी कैंटोर्न के अनुसार रोजाना मशरूम खाने से आंत में लाभदायक बैक्टीरिया में बढ़ोत्तरी हो सकती है। इससे लिवर में ग्लूकोज का बेहतर नियंत्रण किया जा सकता है। इस शोध से डायबिटीज के लिए नए इलाज की राह खुल सकती है। यह निष्कर्ष चूहों पर किए गए अध्ययन के आधार पर निकाला गया है।

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